Haisiyat Praman Patra (हैसियत प्रमाण पत्र) – Online Apply in Uttar Pradesh

UP Haisiyat Praman Patra kaise banwaye – उत्तर प्रदेश हैसियत प्रमाण पत्र ऑनलाइन आवेदन
Haisiyat Praman Patra (हैसियत प्रमाण पत्र) – Online Apply in Uttar Pradesh

Table of Contents

परिचय

Haisiyat praman patra एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति अथवा उसके परिवार की आर्थिक स्थिति, आय एवं चल-अचल संपत्ति का आधिकारिक मूल्यांकन किया जाता है। Haisiyat praman patra का उपयोग विभिन्न सरकारी योजनाओं, कानूनी कार्यों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किया जाता है।

हैसियत प्रमाण पत्र का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाता है। यह प्रमाण पत्र विभिन्न सरकारी एवं कानूनी कार्यों में आवश्यक होता है।

हैसियत प्रमाण पत्र का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाता है:

  • किसी व्यक्ति की आय एवं संपत्ति की स्थिति प्रमाणित करने के लिए
  • विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं अनुदानों में आवेदन हेतु
  • न्यायालयीन कार्यों एवं शपथ पत्र के साथ संलग्न करने के लिए
  • बैंक, लोन, टेंडर एवं नीलामी से संबंधित प्रक्रियाओं में
  • किसी विशेष प्रशासनिक या राजस्व संबंधी कार्य में

उत्तर प्रदेश में हैसियत प्रमाण पत्र तहसील/उप-जिलाधिकारी (SDM) के माध्यम से जारी किया जाता है तथा इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है।

इस ब्लॉग में आपको निम्नलिखित जानकारी विस्तार से दी गई है:

  • हैसियत प्रमाण पत्र क्या है
  • इसकी आवश्यकता क्यों पड़ती है
  • उत्तर प्रदेश में इसका महत्व
  • आवेदन प्रक्रिया (ऑनलाइन/ऑफलाइन)
  • आवश्यक दस्तावेज एवं शुल्क विवरण

👉 क्योंकि हैसियत में आय प्रमाण पत्र लगता है।


हैसियत प्रमाण पत्र क्या है

जब किसी व्यक्ति से यह पूछा जाता है कि उसकी आर्थिक स्थिति कैसी है, उसकी आय कितनी है या उसके पास कितनी संपत्ति है, तो इन्हीं बातों को सरकारी रूप से साबित करने के लिए हैसियत प्रमाण पत्र बनाया जाता है। यह एक ऐसा दस्तावेज है जो आपकी आर्थिक पहचान को सरकार के सामने स्पष्ट करता है।

सरल शब्दों में परिभाषा

  • हैसियत प्रमाण पत्र आपकी आर्थिक स्थिति का सरकारी प्रमाण होता है
  • इससे यह पता चलता है कि व्यक्ति या परिवार की कमाई और संपत्ति कितनी है
  • यह प्रमाण पत्र सरकारी रिकॉर्ड और जाँच के बाद जारी किया जाता है

आय और संपत्ति से संबंध

  • इसमें आपकी मासिक या वार्षिक आय को जोड़ा जाता है
  • परिवार के सभी सदस्यों की संयुक्त आय को भी देखा जाता है
  • बैंक बैलेंस, एफडी, निवेश जैसी चल संपत्तियाँ शामिल होती हैं
  • जमीन, मकान, दुकान आदि अचल संपत्तियों का भी मूल्यांकन किया जाता है

व्यक्तिगत एवं संयुक्त हैसियत प्रमाण पत्र

  • व्यक्तिगत हैसियत प्रमाण पत्र
    • जब केवल एक व्यक्ति की आय और संपत्ति के आधार पर प्रमाण पत्र बनाया जाता है
  • संयुक्त हैसियत प्रमाण पत्र
    • जब पूरे परिवार की आय और संपत्ति को जोड़कर प्रमाण पत्र जारी किया जाता है
    • यह अधिकतर पारिवारिक, कानूनी या सरकारी मामलों में उपयोग होता है

हैसियत प्रमाण पत्र के फायदे

हैसियत प्रमाण पत्र एक ऐसा महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो व्यक्ति या परिवार की आर्थिक स्थिति को सरकारी रूप से प्रमाणित करता है। इसके कई उपयोग और लाभ हैं, जो रोज़मर्रा के सरकारी एवं कानूनी कार्यों में काम आते हैं।

सरकारी योजनाओं में उपयोग

  • विभिन्न राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं में आवेदन के समय
  • आर्थिक सहायता, अनुदान या लाभ प्राप्त करने के लिए
  • पात्रता निर्धारित करने हेतु

कोर्ट और कानूनी मामलों में

  • न्यायालय में आर्थिक स्थिति प्रमाण के रूप में
  • शपथ पत्र या अन्य कानूनी दस्तावेजों के साथ संलग्न करने हेतु
  • संपत्ति विवाद या पारिवारिक मामलों में

बैंक, लोन, टेंडर और नीलामी में

  • बैंक से लोन या वित्तीय सहायता लेने के समय
  • सरकारी या निजी टेंडर प्रक्रिया में
  • नीलामी (Auction) में भाग लेने के लिए
  • आर्थिक क्षमता साबित करने हेतु

अन्य प्रशासनिक कार्यों में

  • विभिन्न राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों में
  • सरकारी विभागों द्वारा मांगे जाने पर
  • विशेष परिस्थितियों में आर्थिक स्थिति दर्शाने के लिए

हैसियत प्रमाण पत्र के लिए पात्रता

हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदक को कुछ आवश्यक योग्यताओं को पूरा करना होता है, ताकि उसकी आर्थिक स्थिति का सही मूल्यांकन किया जा सके।

आवेदक की आयु

  • आवेदक की आयु राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के अंतर्गत होनी चाहिए
  • नाबालिग के मामले में अभिभावक आवेदन कर सकता है

उत्तर प्रदेश का निवासी होना

  • आवेदक का स्थायी या अस्थायी निवास उत्तर प्रदेश में होना आवश्यक है
  • निवास प्रमाण पत्र या संबंधित दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए

परिवार की कुल आय

  • परिवार के सभी सदस्यों की संयुक्त आय का विवरण देना अनिवार्य है
  • आय का सत्यापन सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर किया जाता है

चल और अचल संपत्ति की जानकारी

  • बैंक बैलेंस, एफडी, निवेश आदि चल संपत्तियों का विवरण
  • भूमि, मकान, दुकान जैसी अचल संपत्तियों की जानकारी
  • संपत्ति का मूल्यांकन GAV (Government Approved Valuer) के माध्यम से किया जाता है

जरूरी दस्तावेज

हैसियत प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय आवेदक को व्यक्तिगत, संपत्ति एवं वित्तीय तथा कुछ अनिवार्य दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। सभी दस्तावेज सही और स्पष्ट होने चाहिए।

व्यक्तिगत दस्तावेज

  • आधार कार्ड – पहचान एवं निवास प्रमाण के लिए
  • पासपोर्ट साइज फोटो – हाल की खींची हुई
  • पैन कार्ड – आय एवं वित्तीय पहचान हेतु
  • आय प्रमाण पत्र – सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी

संपत्ति एवं वित्तीय दस्तावेज

  • खतौनी / भूमि दस्तावेज – भूमि या संपत्ति के स्वामित्व हेतु
  • संपत्ति कर रसीद – नगर निगम / पंचायत द्वारा जारी
  • बैंक बैलेंस / एफडी विवरण – नवीनतम वित्तीय स्थिति दर्शाने के लिए

अनिवार्य दस्तावेज

  • Government Approved Valuer (GAV) रिपोर्ट
    • संपत्ति के मूल्यांकन हेतु अनिवार्य
    • बिना GAV रिपोर्ट के आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता

📌 महत्वपूर्ण सूचना:
सभी दस्तावेजों को ऑनलाइन आवेदन के समय स्पष्ट स्कैन कॉपी में अपलोड करना आवश्यक है। गलत या अधूरे दस्तावेज होने पर आवेदन अस्वीकृत किया जा सकता है।


हैसियत प्रमाण पत्र ऑनलाइन आवेदन

हैसियत प्रमाण पत्र ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

1

आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ

2

रजिस्ट्रेशन या लॉगिन करें

3

Part-01 में व्यक्तिगत विवरण भरें

4

Part-02 में संपत्ति का विवरण दें

5

Part-03 में आय का विवरण भरें

6

Part-04 में सक्षम प्राधिकारी चुनें

7

Part-05 में घोषणा पत्र स्वीकार करें

8

आवेदन शुल्क का भुगतान करें

9

फॉर्म सबमिट कर आवेदन संख्या सुरक्षित रखें


हैसियत प्रमाण पत्र कौन जारी करता है

हैसियत प्रमाण पत्र राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अंतर्गत आने वाले सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी किया जाता है। आवेदन की जाँच एवं सत्यापन के बाद ही यह प्रमाण पत्र स्वीकृत किया जाता है।

  • तहसीलदार
    • अधिकांश मामलों में हैसियत प्रमाण पत्र तहसीलदार द्वारा जारी किया जाता है।
    • लेखपाल एवं राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर स्वीकृति दी जाती है।
  • उप जिलाधिकारी (SDM)
    • बड़े मामलों या अधिक संपत्ति/आय वाले प्रकरणों में
    • तहसील स्तर से अग्रसारित आवेदन पर SDM अंतिम निर्णय लेते हैं।
  • सक्षम राजस्व अधिकारी
    • कुछ विशेष परिस्थितियों में राज्य सरकार द्वारा नामित अन्य सक्षम अधिकारी
    • प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार प्रमाण पत्र जारी करते हैं।

📌 महत्वपूर्ण जानकारी:
कौन-सा अधिकारी प्रमाण पत्र जारी करेगा, यह आवेदन के Part-04 (संपत्ति एवं मूल्य के अनुसार) निर्धारित किया जाता है।


हैसियत प्रमाण पत्र की जांच प्रक्रिया

हैसियत प्रमाण पत्र जारी करने से पहले सरकार यह सुनिश्चित करती है कि आवेदक ने जो जानकारी दी है, वह सही और वास्तविक है। इसी कारण आवेदन की जाँच तीन चरणों में की जाती है।

  • लेखपाल द्वारा भौतिक सत्यापन
    • लेखपाल आपके बताए गए पते और संपत्ति की मौके पर जाकर जाँच करता है।
    • जमीन, मकान या अन्य संपत्तियों की स्थिति देखी जाती है।
    • आसपास के रिकॉर्ड और स्थानीय जानकारी से मिलान किया जाता है।
  • राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट
    • लेखपाल की जाँच रिपोर्ट को राजस्व निरीक्षक दोबारा जांचता है।
    • दस्तावेज सही हैं या नहीं, इसका मिलान करता है।
    • सब कुछ सही होने पर आगे के लिए संस्तुति देता है।
  • सक्षम अधिकारी द्वारा अंतिम स्वीकृति
    • तहसीलदार या SDM सभी रिपोर्ट देखकर अंतिम निर्णय लेते हैं।
    • जानकारी सही पाए जाने पर हैसियत प्रमाण पत्र स्वीकृत कर दिया जाता है

📌 जरूरी बात:
अगर जाँच के दौरान कोई जानकारी गलत या अधूरी पाई जाती है, तो

  • आवेदन रोका जा सकता है,
  • अतिरिक्त दस्तावेज माँगे जा सकते हैं,
  • या आवेदन निरस्त भी हो सकता है।

इसलिए आवेदन करते समय सही और पूरी जानकारी देना बहुत जरूरी है।


हैसियत प्रमाण पत्र शुल्क

हैसियत प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय आवेदक को निर्धारित सरकारी शुल्क का भुगतान करना होता है। यह शुल्क ऑनलाइन आवेदन एवं सेवा सुविधा के अनुसार लिया जाता है।

  • ऑनलाइन आवेदन शुल्क
    • हैसियत प्रमाण पत्र के ऑनलाइन आवेदन के लिए सरकार द्वारा ₹120 निर्धारित है।
  • CSC सेवा शुल्क
    • यदि आवेदन जन सेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से किया जाता है, तो
    • CSC द्वारा निर्धारित 10% सेवा शुल्क अलग से लिया जाता है।
  • कुल देय शुल्क
    • ऑनलाइन आवेदन शुल्क + CSC सेवा शुल्क
    • कुल राशि आवेदन के तरीके पर निर्भर करती है।

📌 ध्यान देने योग्य बात:
शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम (नेट बैंकिंग / डेबिट कार्ड / यूपीआई) से किया जाता है।
एक बार भुगतान किया गया शुल्क वापस नहीं किया जाता


हैसियत प्रमाण पत्र बनने में कितना समय लगता है

अक्सर लोगों का यही सवाल होता है कि आवेदन करने के बाद हैसियत प्रमाण पत्र कितने दिन में बनता है। तो इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझ लो।

  • सामान्य समय सीमा
    • अगर सभी कागज़ सही हैं और कोई दिक्कत नहीं है, तो
    • हैसियत प्रमाण पत्र आमतौर पर 15 से 30 दिन में बन जाता है।
  • देरी होने के कारण
    • कागज़ पूरे या सही न होना
    • लेखपाल की जाँच में देर होना
    • GAV रिपोर्ट समय पर न मिलना
    • अधिकारी द्वारा अतिरिक्त जाँच या जानकारी माँग लेना

📌 देसी सलाह:
फॉर्म भरते समय सही जानकारी और पूरे दस्तावेज लगा दोगे, तो
👉 चक्कर कम लगेंगे
👉 काम जल्दी निपटेगा


हैसियत प्रमाण पत्र स्टेटस कैसे चेक करें

आवेदन करने के बाद हर किसी को जानना होता है कि फॉर्म कहाँ तक पहुँचा। इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन स्टेटस चेक की सुविधा दी है।

  • आवेदन संख्या के माध्यम से
    • जब आप फॉर्म सबमिट करते हैं, तो आपको एक आवेदन संख्या (Application Number) मिलती है।
    • इसी नंबर की मदद से आप अपने आवेदन का स्टेटस देख सकते हैं।
  • ऑनलाइन पोर्टल से
    • संबंधित राज्य के आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ।
    • “आवेदन की स्थिति / Application Status” वाले विकल्प पर क्लिक करें।
    • आवेदन संख्या दर्ज करें और सबमिट करें।
    • स्क्रीन पर आपके आवेदन की वर्तमान स्थिति दिखाई दे जाएगी।

📌 देसी टिप:

  • आवेदन संख्या लिखकर या फोटो खींचकर रख लें
  • बिना आवेदन नंबर के स्टेटस देखना मुश्किल होता है।

हैसियत प्रमाण पत्र में सुधार कैसे करें

कई बार आवेदन करते समय नाम, पता, आय या संपत्ति में छोटी-मोटी गलती हो जाती है। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है, सुधार कराया जा सकता है

  • गलती होने पर संशोधन प्रक्रिया
    • अगर आवेदन अभी जाँच में है, तो संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर
      “संशोधन / Correction” का विकल्प चुन सकते हैं।
    • गलत जानकारी को सही करके दोबारा सबमिट करना होता है।
  • सुधार आवेदन का तरीका
    • अगर प्रमाण पत्र जारी हो चुका है, तो
      • तहसील या जन सेवा केंद्र (CSC) पर जाकर
      • सुधार आवेदन (Correction Application) देना होता है।
    • सही जानकारी से जुड़े समर्थन दस्तावेज भी साथ लगाने पड़ते हैं।

📌 देसी सलाह:

  • सुधार जल्दी करा लो, वरना बाद में फिर से नया आवेदन करना पड़ सकता है।
  • आवेदन भरते समय हर जानकारी ध्यान से जाँचकर भरें।

हैसियत प्रमाण पत्र आवेदन रद्द होने के कारण

कई बार लोग सही तरीके से फॉर्म नहीं भरते या जरूरी कागज़ पूरे नहीं लगाते, जिस वजह से आवेदन रद्द हो जाता है। नीचे सबसे आम कारण दिए गए हैं, ताकि आप उनसे बच सकें।

  • गलत आय या संपत्ति का विवरण
    • आय या संपत्ति की जानकारी कम-ज्यादा या गलत देना।
    • सरकारी रिकॉर्ड से जानकारी का मिलान न होना।
  • GAV रिपोर्ट न लगाना
    • संपत्ति का मूल्यांकन कराने के बाद भी
      Government Approved Valuer (GAV) रिपोर्ट अपलोड न करना।
    • बिना GAV रिपोर्ट के आवेदन स्वीकार नहीं होता।
  • अधूरे या गलत दस्तावेज
    • जरूरी कागज़ अपलोड न करना।
    • साफ़ स्कैन न होना या गलत दस्तावेज लगाना।
  • गलत घोषणा देना
    • घोषणा पत्र में गलत जानकारी देना।
    • जानबूझकर तथ्य छिपाना या गलत बयान देना।

📌 सीधी-सी बात:
अगर आप सही जानकारी, पूरे दस्तावेज और सही GAV रिपोर्ट लगाते हैं,
तो आवेदन के रद्द होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।


हैसियत प्रमाण पत्र की वैधता

हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के बाद यह जानना जरूरी होता है कि यह कितने समय तक मान्य रहता है और कब दोबारा बनवाना पड़ता है

  • प्रमाण पत्र की मान्य अवधि
    • हैसियत प्रमाण पत्र आमतौर पर सीमित समय के लिए मान्य होता है।
    • अधिकतर मामलों में इसकी वैधता 6 महीने से 1 वर्ष तक मानी जाती है।
    • अलग-अलग विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार इसकी वैधता तय कर सकते हैं।
  • दोबारा कब बनवाना आवश्यक है
    • जब प्रमाण पत्र की वैधता समाप्त हो जाए।
    • आय या संपत्ति में कोई बड़ा बदलाव हो जाए।
    • किसी सरकारी या कानूनी कार्य में नया प्रमाण पत्र माँगा जाए।

📌 देसी सलाह:
जहाँ भी प्रमाण पत्र देना हो, पहले यह पूछ लें कि
👉 कितनी अवधि का प्रमाण पत्र मान्य है,
ताकि बाद में दिक्कत न आए।


महत्वपूर्ण निर्देश

हैसियत प्रमाण पत्र से जुड़ी प्रक्रिया में कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

  • गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई
    • यदि आवेदन में जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी दी जाती है,
    • तो आवेदक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
  • प्रमाण पत्र निरस्त किया जा सकता है
    • जाँच के दौरान या बाद में यदि जानकारी गलत पाई जाती है,
    • तो जारी किया गया हैसियत प्रमाण पत्र रद्द (निरस्त) किया जा सकता है।

📌 देसी सलाह:
फॉर्म भरते समय सच और सही जानकारी ही दें।
थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी परेशानी से बचा सकती है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q : पक्की रजिस्ट्री कैसे होती है?

A : पक्की रजिस्ट्री जमीन या मकान की कानूनी रजिस्ट्री होती है, जो सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में स्टांप शुल्क और जरूरी दस्तावेजों के साथ की जाती है।

Q : हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए क्या-क्या डॉक्यूमेंट चाहिए?

A : इसके लिए आधार कार्ड, फोटो, आय प्रमाण पत्र, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक बैलेंस/एफडी विवरण और Government Approved Valuer (GAV) रिपोर्ट की आवश्यकता होती है।

Q : हैसियत प्रमाण पत्र क्या है?

A : हैसियत प्रमाण पत्र एक सरकारी दस्तावेज है, जो किसी व्यक्ति या परिवार की आय और चल-अचल संपत्ति को आधिकारिक रूप से प्रमाणित करता है।

Q : हैसियत क्या होती है?

A : हैसियत का मतलब होता है किसी व्यक्ति या परिवार की आर्थिक स्थिति, यानी उसकी आय, संपत्ति और कुल आर्थिक क्षमता।

Q : मूल निवास के लिए कौन-से डॉक्यूमेंट चाहिए?

A : मूल निवास के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड/वोटर आईडी, बिजली या पानी का बिल और कभी-कभी स्कूल प्रमाण पत्र माँगा जाता है।

Q : हैसियत प्रमाण पत्र कितने दिनों में बन जाता है?

A : अगर सभी कागज़ सही हों, तो हैसियत प्रमाण पत्र आमतौर पर 15 से 30 दिनों के भीतर बन जाता है।

Q : Domicile Certificate क्या होता है?

A : Domicile Certificate को मूल निवास प्रमाण पत्र भी कहते हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि व्यक्ति किस राज्य या जिले का स्थायी निवासी है।

Q : प्रमाण पत्र कब तक मान्य होता है?

A : अधिकतर प्रमाण पत्र 6 महीने से 1 साल तक मान्य होते हैं। कई विभाग नई तारीख का प्रमाण पत्र ही स्वीकार करते हैं।

Q : मूल निवास बनवाने में कितने पैसे लगते हैं?

A : ऑनलाइन आवेदन शुल्क आमतौर पर ₹30 से ₹50 तक होता है। CSC से बनवाने पर अतिरिक्त सेवा शुल्क लग सकता है।


निष्कर्ष

हैसियत प्रमाण पत्र एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है, जो किसी व्यक्ति या परिवार की आर्थिक स्थिति और संपत्ति को प्रमाणित करता है। इस ब्लॉग में हमने हैसियत प्रमाण पत्र से जुड़ी पूरी जानकारी सरल भाषा में समझाई है, ताकि आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

आवेदन करते समय सही और सत्य जानकारी देना बहुत जरूरी है। अगर सभी दस्तावेज पूरे और सही हों, तो प्रमाण पत्र आसानी से और समय पर बन जाता है। गलत जानकारी देने से न केवल आवेदन रद्द हो सकता है, बल्कि आगे चलकर कानूनी समस्या भी हो सकती है।

📌 सीधी सलाह:
फॉर्म भरते समय जल्दबाज़ी न करें,
हर जानकारी ध्यान से जाँचकर भरें,
और जरूरत पड़ने पर जन सेवा केंद्र (CSC) की मदद लें।

सही जानकारी और दस्तावेजों के साथ haisiyat praman patra के लिए आवेदन करने से प्रमाण पत्र समय पर प्राप्त किया जा सकता है।


Author Profile
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Deepak Gupta

मैं दीपक गुप्ता, PanchayatSahayak.com का संस्थापक एवं संपादक हूँ।
वर्ष 2021 से उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग में
पंचायत सहायक के पद पर कार्यरत हूँ।

यहाँ लेबर कार्ड, शादी अनुदान योजना,
आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र,
जन सेवा केंद्र एवं e-District से जुड़ी
सरकारी जानकारी सरल भाषा में साझा करता हूँ।

इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी
सरकारी आदेशों एवं आधिकारिक पोर्टलों
के आधार पर तैयार की जाती है।

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